विंग कमांडर अभिनंदन की दास्तां: कैसे लौटा वतन एक वतनपरस्त
देश अपने जिस वीर के लिए साँस थामे बैठा था, वो वीर विंग कमांडर अभिनंदन दुश्मन के पंजों से छूट के भारत लौट चुका है। दुश्मन के इलाके में दुश्मन द्वारा पकड़े जाने से खतरनाक शायद ही कुछ होता होगा। आपकी ज़िंदगी उन दरिंदो के रहमो कर्म पर होती है जो न केवल आपको परंतु आपके पूरे देश का नाश देखना चाहते हैं। शायद इसीलिए जब हमारे वीर विंग कमांडर अभिनन्दन पाकिस्तान द्वारा पकड़े गए थे तो सबकी जान अटक गई थी।
यहां तक बात पहुंची कैसे?
गौरतलब है कि जैश–ए–मोहम्मद ने १४ फरवरी को एक घिनौने अपराध तहत हमारे 40 जवानो को हमसे छीन लिया था। हमारे पड़ोसी पाकिस्तान ने सहानुभूति जताने की जगह धमकिया और असंवेदनशील कमेंट्स दी जिससे भारत पाकिस्तान में तनाव बढ़ गयी। भारत ने अपनी जवानों के शहादत का बदला पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में घुस कर लिया। भारतीय वायु सेना ने यह घुस कर जैश–ए–मोहम्मद के आतंकी ठिकानों पर बम गिराए और काम से कम १०० आतंकियों को दोहजक पहुँचा दिया। इसके बाद पाकिस्तान ने आव देखा न ताव और हर दिन सीमा पर गोलियां चलने लगी और पाकिस्तानी वायु सेना के विमान दिखने लगे। ऐसे ही एक विमान से अपने देश की रक्षा करते हुए विंग कमांडर अभिनंदन का विमान घायल हो घायल हो गया और वे दुश्मन के इलाके में जा गिरे।
पाकिस्तान में क्या हुआ हमारे वीर के साथ
इस खतरनाक दुर्घटना के बाद वे बुरी तरह चोटिल थे परंतु उन्होंने पूरे होश में जिस सूझ-बूझ और बहादुरी का प्रदर्शन किया उसका वर्णन केवल कहानियों में सुना था। खून से लथ पट और टूटी हुई पीठ के साथ उन्होंने इंसानो को देखते ही सबसे पहले पूछा कि वो भारत में या पाकिस्तान मे। उन लड़को ने भी बड़ी चालाकी दिखाते हुए बोला कि वो भारत में हैं। हमारे वीर ने फिर भी अपनी मुस्तैदी नही त्यागी और कुछ नारे लगाए जो एक आदमी को हजम नही हुए और उसने चिल्ला दिया कि ‘”पाकिस्तान आर्मी ज़िंदाबाद!”। इतनी सी बात थी कि विंग कमांडर अभिनंदन तुरंत समझ गए कि वो दुश्मन के ज़मीन पर हैं। उन्होंने ने अपनी पिस्तौल निकाली और हवा में गोलियां चलाई और टूटी हुई पीठ लेकर कुछ ज़रूरी दस्तावेज़ नष्ट किये। इसके बाद वे उन क्रूर लोगों के हाथ आ गए जिन्होंने उनके साथ और हिंसा की और उनका वीडियो सोशल मीडिया पे डाल दिया।
भारत पाकिस्तान तनाव का चेहरा
विंग कमांडर अभिनंदन ने अब भारत पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव को एक मानव चेहरा प्रदान कर दिया था। शायद इस चेहरे ने देश को बता दिया था कि कमांडर अभिनंदन को वापस पाने की उम्मीद से ही खुश और अब अंतर्देशीय राजनीति किसी आम आदमी के दिमाग पे नही थी। सब बस यह चाहते थे कि एक बेटा सही सलामत लौट आये।
एक पाकिस्तानी ने अमन की इस कोशिश को रोकने की कोशिश करते हुए पाकिस्तानी उच्च न्यायालय में अभिनंदन की वापसी रोकने की मांग की थी। परंतु सारी बाधा पर कर ली गयी और एल बीटा अपने देश लौट पाया।
लौट आया वीर जवान
पाकिस्तान ने उन्हें हवाई मार्ग से भेजने से मना कर दिया और वाघा बॉर्डर के द्वारा लौटाया। शाम को पूरे देश की जैसे सांस रुक गयी थी। अगर आप उससे वक़्त बाहर गए होंगे तो आपने पाया होगा कि हर वो इंसान जो टिवी के सामने नही है वो अपना फ़ोन पकड़े बैठा है। सब पलके बिछाये विंग कमांडर अभिनंदन का इंतज़ार कर रहे थे और पाकिस्तान उनकी वापसी में देरी किए जा रहा था।
वाघा बॉर्डर पर एक भीड़ इकठा हो गयी थी जो किसी फ़िल्म की याद फिला रही थी। ये एक तरह से काफी उचित भी था क्योंकि वो भीड़ एक असली हीरो का इंतज़ार कर रही थी। अन्ततः रात को देश को विंग कमांडर अभिनंदन के दर्शन हुए। इसके बाद एक करिश्मा से हुआ। वही देश वासी जो युद्ध की मांग कर रहे थे अब अपने वीर को देख कर खुश और संतुष्ट थे। अभिनंदन जी की बहादुरी की मिसाल सदियों तक दी जाएंगी।
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